Sunday, November 30, 2008

सफरनामा .शिवपुरी से ओली तक ....

हमारा गेंग








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हमारा गेंग





जब घर से चले थे तो दिल्ली की गर्मी से निजात पाने की उम्मीद थी और दिल में था कुछ गुनगुनाता सा
मीठा मीठा संगीत मंद बहती हवा का एहसास और ..आँखो में सपने थे ..पेडो से ढके पहाड़ की हरियाली और भी बहुत कुछ ...ख़ुद बा ख़ुद दिल किसी गीत की रचना करने लगा था


कल- कल बहती गंगा यही संदेश देती है
चलते चलो- चलते चलो !!

बहती मस्त बयार ,
ठंडी जैसे कोई
फुहार

लहराते डगमगाते पहाडी से रास्ते
नयना ना जाने किसकी है राह तकते



सफ़र शुरू हुआ ... दिल्ली की गर्मी भी सफ़र में दूर दूर तक साथ चलती रही ... .शहर की भाग दौड़ से दूर दो पल शांत बिताने की चाहा हमे उतराँचल की गोद में ले गयी ... तेज़ गर्मी और लंबा सफ़र के बीच मोदी नगर की जैन शिकजी और चीतल रिसोर्ट ने हमारे सफ़र को कुछ मीठा सा बना दिया .... हरिद्वार और ऋषिकेश को पार करते हुए थोडा सा आगे हम कोडियल के गड़वाल रेस्ट हाउस तक जब पहुचे तो जैसे सफ़र की सारी थकावट गंगा के कल कल बहते पानी को देख कर उतरने लगी .. पर गरमी का असर यहाँ भी ख़ूब दिख रहा था .. हवा का एक झोंका नही ..


- ज़िंदगी जीने की चाहा में
सब कुछ अपना बनाने की राह में

यहाँ सब छूटा सा जाता है
जंगल से पेडो का ,
मंद बहती समीरो का
साथ अब रूठा जाता है


पर
चारो तरफ़ पहाड़ से घिरे और गंगा के किनारे बसे इस रेस्ट हाउस ने हमे जैसे अपने मोह में बाँध लिया .... अगले दिन रफ्टिंग का जोश सबके चेहरे पर दिख रहा था ...बहुत ही रोमांचक लगता है गंगा की शीतल बहाव और तेज़ धारा में कूदना ...

वहाँ
से मेरिन ड्राइव से शिवपुरी का रास्ता कई रॅपिड को पार करते हुए मेरे लिए तो बहुत ही नया और रोमांचक अनुभव रहा ..... उसके बाद भी कितनी देर हम यूँ ही गंगा की गोद में बैठे गर्मी को दूर करने में लगे रहे ....







हमारा अगला पडाव ओली था ..
सुबह
5 बजे पहाड़ के उगते सूरज की लालिमा
और कुछ हद तक ठंडी हवा में सफ़र शुरू हुआ ....


देवप्रयाग.श्रीनगर .. रुद्रप्रयाग और जोशीमठ तक कई सुंदर नज़ारे आँखो में बस गये
...
जोशीमठ से 14 किलोमेटर उँचाई पैर स्केटिंग के लिए मशहूर ओली इस मौसम में अपने में अदभुत सुंदरता समेटे हुए हैं ..वहाँ बनी हट्स और उस के सब तरफ़ खिले सफ़ेद फूल , आस पास विशाल पहाड़ दूर किसी किसी छोटी पर अभी भी कुछ बर्फ़ दिख रही थी . जैसे हम से कह रहे थे की आओ कुछ देर हमारे साए में अपनी ज़िंदगी की सारी भाग दौड और परेशानी भुला दो ..बस कुछ पल सिर्फ़ यहाँ सुंदरता में खो जाओ ..भर लो बहती ताज़ी हवा जो शायद कुछ समय बाद यहाँ भी नही मिलेगी ..... बादलो के बीच में ट्राली का सफ़र जैसे बादलो के संग ही उड़ता सा लगता है ...





चेहरे को छूते बादल जैसे अपने स्पर्श से बता देना चाहते हैं की जो ठंडक उन में है वो आज के चलते ए-सी में नही "> और यह पहाड़ जब सर्दी में सफ़ेद बर्फ़ से ढ़क जाते होंगे तो कितने सुंदर लगते होंगे इसका अंदाज़ा यहाँ पर बिखरी सुंदरता से आसानी से लगाया जा सकता है ....उपर कुछ पहाड़ो में लगे देवदार के पेड़ जैसे किसी समाधी में लीन लगे जो शायद यह तपस्या कर रहे थे की यूँ हमारी सुंदरता को बना रहने दो आओ ..कुछ पल सकुन की साँस लो और आने वाले कल के लिए यह सब रहने दो ....पर फिर भी जैसे कुदरत अंतिम सांसो तक कुछ ना कुछ मानव को देती लगती थी ..जैसे कह रही हो की देख लो मैं अभी भी तुम्हारे साथ अपने संपूर्ण सुंदरता के साथ रह सकती हूँ यदि तुम मुझे सहज कर संभाल कर रखो ..... यह सफ़र अभी आधा था क्यूँकी ............उतराखंड की वास्तिवक सुंदरता तो बदरीनाथ . केदार नाथ .. हेम कुंड साहिब और फूलो की घाटी में छिपी हुई है .. और मुझे वहाँ अभी जाना है जल्दी ही ...
पर जितना भी देखा वो ना भूलने वाले पल थे ...दिल जैसे कह उठा ..













सारी कायनत एक धुन्ध की चादर में खो रही है
एक कोहरा सा ओढ़े यह सारी वादी सो रही है

गूँज रहा है झरनो में कोई मीठा सा तराना
हर साँस महकती हुई इन की ख़ुश्बू को पी रही है

पिघल रहा है चाँद आसमान की बाहो में
सितारो की रोशनी में कोई मासूम सी कली सो रही है

रूह में बस गया है कुछ सरूर इस समा का
सादगी में डूबी यहाँ ज़िंदगी तस्वीर हो रही है

है बस यही लम्हे मेरे पास इस कुदरत की सोगात के
कुछ पल ही सही मेरी रूह एक सकुन में खो रही है !!



मुस्कानसुंदरता यूँ ही रहने देन















हमारे दल का नन्हा यात्री मुस्कान ..इसके चेहरे की मुस्कान यही कहती है की
मेरे बड़े होने तक यह सुंदरता यूँ ही रहने देना :)





11 comments:

रचना गौड़ ’भारती’ said...

Nice Journey
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

dr.bhoopendra singh said...

beautiful blog with beautiful pictures. welcome and enrich us with some new posts.
dr.bhoopendra

प्रकाश बादल said...

काफी रोमांचक लगी आपकी ये यात्रा और मुस्कान तो और भी प्यारी। आप हमारे इलाके से होकर गई और आपको अच्छा लगा आपका स्वागत है।

Nrajal said...

sach itne khubsurati se aapne yatra
ke bare mein likha hai aise laga hum bhi aapke saath bhoom rahe hain.
aapko padhna acha laga.

अशोक मधुप said...

सफरनामा बहुत अच्छा लगा।
स्वागत है। लिखते रहिए। कृपया वर्ड वैरिफिकेशन हटा दें।

ATULGAUR (ASHUTOSH) said...

अपनी भावनाए व्यक्त करने के लिए मुबारक लिखते रहे

Udan Tashtari said...

अरे वाह, स्वागत है इस रोचक चिट्ठे का भी.

एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

विनीता यशस्वी said...

Achha yatra vritant lika hai apne.

दिगम्बर नासवा said...

क्या बात है
बहुत खूब लिखा, सुंदर अभिव्यक्ति

royal rajasthan said...

GOOD

संगीता पुरी said...

आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।