Thursday, December 18, 2008

गुजरात यात्रा भाग २

गुजरात जब मैं आज से लगभग २० साल पहले गई थी तो उस वक्त सोचा भी नही था कि दुबारा फ़िर यहाँ आना होगा ..पर जो बांके बिहारी की इच्छा ...इस बार का घूमना तो एक यादगार पल बन गया सब बहने और उनके बच्चे अपने बच्चे ,और एक नया जोश विश्वास .सब कुछ अदभुत था ..
हमारा सफर शुरू हुआ २६ दिसम्बर से रात को ८ बजे राजधानी से चले और सुबह ठीक १० बजे अहमदाबाद ..रास्ते में की खूब मस्ती आगे घूमने का जोश बढे से ले कर छोटे सब में था ..अहमदाबाद में गेस्ट हॉउस बुक था ..सब जा के पहले फ्रेश हुए ..और बढ़िया सी चाय पी कर चल पढे सबसे पहले अपने मनपसंद जगह शापिंग ...यह जगह लाल दरवाज़ा नाम से मशहूर है जम के शापिंग की हम सबने और फ़िर परेशान हो गए कि अब आगे तो इतनी यात्रा करनी है जो खरीदा है उस समान का क्या करें ...बहुत मुश्किल से बेटी जहाँ रहती थी वहां पी जी के रूप में उसके कमरे में वह सब समान रखा ..समय भी कम था और आगे जाना था तो शापिंग को दी यही मन मार के लगाम ..और इस के बाद चला हमारा कारवां यू एस पिज्जा की तरफ़ ..यह भी एक मजेदार जगह है ..अहमदाबाद की ..१५५ रुपीस में जितना मरजी आए सलाद खायो . पिज्जा खाओ सूप पीयो ...गार्लिक ब्रेड खाओ .सच में हर बार कुछ नया सलाद और दिल भर के खाने की छूट .पर बेचारा पेट भी क्या करे :) इन सबको खाने के बाद देते हैं आइस क्रीम ..वह एक ही देते हैं ..दिल किया सुझाव दूँ भाई यह भी अनलिमिटेड कर दो ...उनसे पूछा कि इतनी बेहतरीन है आपकी यह सर्विस आप दिल्ली या एन सी आर में इस को क्यों खोलते ..जवाब दिया धीरे से मेरी छोटी बहन ने की शायद यह जानते हैं की वहाँ के लोग बिंदास है और खूब खाते हैं .. खैर द्वारका जाने का समय Tavera से रात को १२ बजे तय हुआ था अभी जाने में समय था क्या करे ..बच्चो ने शोर मचाया की चलो यहाँ एक मूवी देखेते हैं .टिकेट लिए और देखी वेलकम :) बस मूवी खत्म होते ही जाने का समय भी हो गया ...सबने अपने समान को पैक करके आगे की यात्रा शुरू की ...एक बात माननी पड़ेगी कि वे रोड्स और रोशनी सड़कों पर खूब हैं ..पूरा रास्ता साफ सुथरा कही से एक बार नही लगा कि हम इतनी रात को सफर कर रहे हैं .दिन में गरम रहने वाला गुजरात रात को काफ़ी ठंडा था ..कहीं कहीं कोहरा भी घना सा आया पर सुबह ५ बजे हम द्वारका में थे यहाँ हमारी कोई बुकिंग नही थी ...और जिस धर्मशाला रेस्ट हॉउस या होटल में पता कर वही फुल ..सुबह होने में अभी देर थी ...हलका सा अँधेरा था अभी माहोल में और कुछ ठंडक भी ..एक ऑटो वाले ने कहा की वह हमारे साथ चल कर बता सकता है की कोई होटल या कुछ देर रहने को झ्गाह मिल जाए ..बहुत तलाश करने के बाद एक कमरा मिला ५०० रुपीस में .हमने कुछ देर ही रुकना था फ़िर आगे निकालना था बेट द्वारका और आगे पोरबंदर के लिए श्री द्वारका नाथ जी का मन्दिर पश्चिम समुन्दर के किनारे है यह हिंदू धरम के चार धामों में से एक माना जाता है यहाँ पर कृष्ण जी की प्रतिमा बहुत ही प्रभावशाली है ...द्वारकानाथ जी के वस्त्र समय अनुसार बदले जाते हैं ,होली ,दिवाली .जन्माष्टमी के मौके पर इनका सिंगार देखने वाला होता है ..यहीं पर पास ही संगम स्थान भी है गोमती नदी के दर्शन भी यहीं होते हैं सब बहुत ही पावन है ..पर वही बात की पण्डे आपको बहुत परेशान करेंगे और गोमती नदी के दर्शन हेतु जायेंगे तो वहाँ इतनी काई है कि पैर फिसलने का डर होता है ..और उस पर पंडो का इजहार कि यहाँ पर आचमन करो ..खैर हम सबने तो श्रद्धा पूर्वक बस हाथ जोड़े और प्रसाद अपनी श्रद्धा से वहाँ अर्पण किया .अब पेट पूजा की बारी थी सुबह से सबको हिदायत दे दी थी की पहले दर्शन होंगे फ़िर खाने पीने की बात कोई करेगा ,,खाने की लिए जब जगह देखी तो सब तरफ़ ढोकला .दाल वडा,और कुछ नमकीन दिखी ..बताया गया कि यहाँ के लोग यही नाश्ता करते हैं ..अब बच्चे यह सब खाने की तेयार नही थे .बहुत मुश्किल से कुछ दूर जाने पर एक पंजाबी होटल मिला ..पर वहाँ का सर्विस करने वाला बन्दा शायद हमसे भी ज्यादा थका था ..इतनी देर में पूरी आलू ,लाया कि हम सब कि भूख भी बाय बाय बोल गई :) आगे चले बेट द्वारका की तरफ़ ...यह समुन्दर के बीच में बना द्वारका नाथ जी का मन्दिर है .इस पर जाने के लिए मोटर बोट करनी पड़ती है ..अब तक १२ बज चुके थे और गरमी पूरी तरह से हावी थी ...एक तो धूप तेज सामने सारा समुन्दर जिसका पानी बहुत ही साफ था और उस पर मोटर बोट वाले टैब तक नही चलते जब तक सवारी पूरी से भी जायदा न हो जाए ..कृष्ण कृष्ण करके मोटर बोट चली ..वहाँ पहुंचे तो पता चला की मन्दिर के द्वार अभी ४ बजे से पहले नही खुलेंगे ,बाहर से माथा टेका ...फ़िर वही की मोटर बोट तभी चलेगी जब तक यह पूरी तरह से भर नही जाती है ..उस दिन जो धूप में हम सब तपे ..भूल नही सकते हम उस समय को ..किनारे पहुँचते ही पीया खूब सारा पानी ठंडा तो जान में जान आई ...आगे बढ़ा हमारा कारवां इसके बाद पोरबंदर ...
यहाँ पर हमारी बुकिंग पहले से ही तोरण गेस्ट हॉउस में बिटिया ने करवा रखी थी बहुत ही सुंदर जगह समुन्दर के किनारे ..खुला सा गेस्ट हॉउस देख के ही आधी थकावट उतर गई ...थोड़ा फ्रेश हुए ..और सामने बीच पर जा के बहुत देर तक बेठे रहे .यहाँ के समुन्दर का पानी इतना खारा है कि किनारे पर बालू सख्त चट्टान सी हो चुकी है ..ठंडी हवा में जितनी देर बैठ सकते थे बैठे फ़िर भूख लगने पर वहाँ के स्वागत होटल में गए .बहुत ही अच्छा खाना था वहाँ का अब सब बहुत थके हुए थे ..पर कोई सोने के मूड में नही था . सो क्कुह देर बात गपशप कि ..कुछ देर हँसी मजाक के बाद सब कि आँखे बंद होने लगी ...और जब सुबह उठे तो सब एक दम उगते सूरज से फेश थे सब फटाफट नहाए और हमारा शुरू हुआ सबका फोटोशेशन ..सबने खूब फोटो लिए और चल पढे फ़िर गाधी जी के जन्म स्थान की और ...बहुत ही सुंदर जगह .वहाँ पग पग पर गांधी जी के होने का एहसास था और दिल में था ख़ुद के भारतीय होने का गर्व ..यहाँ कुछ देर रुकने के बाद चल पढे हम सोमनाथ की तरफ़ ...पोरबंदर से सोमनाथ का रास्ता बहुत ही सुंदर है ..बहुत ही हरियाला सा ..नारियल और केले के खेत मन मोह लेते हैं ..इसी रास्ते में आया माधवपुर बीच बहुत ही सुंदर और साफ ..कुछ देर रुक के हमने यहाँ खूब मस्ती की ..फोटो और यहाँ पर खूब सारा नारियल पानी पीने के बाद ..चल पड़े आगे ..सोमनाथ मन्दिर ..यहाँ पर बुकिंग नही थी और यही पर एक अनजान ऑटो वाले ने हमारी बहुत मदद की ..बिना किसी स्वार्थ के उसने हमे उस अनजान जगह पर कई अच्छे होटल दिखाए ..पर नए साल के स्वागत में वहाँ सब होटल फुल थे ...उस अनजान ऑटो वाले ने हमारी बहुत मदद की और आखिर हमे मिल ही गया एक गेस्ट हॉउस ..समान रखा और सोमनाथ मदिर के दर्शन किए .बहुत ही सुंदर मन्दिर है यह समुन्दर के किनारे बना हुआ ख़ुद में कई इतिहास समेटे ..पहले भी कई लुटा गया कई बार बना कई बार टुटा और अब भी शायद आतंकवाद के निशाने पर है तभी बहुत ही ज्यादा सिक्यूरिटी थी ....यहाँ हमे पता नही था पहले सो ज्यादा फोटो नही ले पाये यहाँ के ..रास्ते में विरावल भी देखा जहाँ कृष्ण जी को तीर लगा था और रात को देखा लाईट एंड साउंड शो जो सोमनाथ मन्दिर बनने और टूटने की पूरी कथा बताता है ..अच्छा लगा इसको और अच्छा बनाया जा सकता है ..पर जितना भी देखा बहुत पसंद आया ... समुन्दर की लहरों की आवाज़ उस पर शिव की आरती .सुंदर मन को मोह लेने वाली थी यह ..कभी न भूलने वाला समां है यह ....रात के दस बजने वाले थे हमने रात्रि दर्शन किए और खाना खा के सो गए ..नही नही चुप चाप नही ..कुछ देर आज के घूमने की बातें और कुछ गाने और शरारते कर के ..छोटी बेटी को थोड़ा सा बुखार आ गया था सो सबको कहा अब सो जाओ ..ताकि कल दियू के निकला जा सके .जो वहाँ से सिर्फ़ ८० किलोमीटर की दूरी पर है ..रास्ता बहुत ही सुंदर वही नारियल और केले के पेड़ ..और जब गेस्ट हॉउस पहुंचे तो बस वह देख के मज़ा आ गया यह जगह उन थी दियू से १० किलोमीटर दूर ..दियू शहर बहुत ही सुंदर है .घर इतने सुंदर है कि बस वही देखते रहने को दिल करता है ..पर बीच उतना ही गंदे पानी का ..शायद वहाँ होने वाली वाटर गेम्स और चलने वाली मोटर बोट ने पानी को साफ नही रहने दिया .खूब मौज की यहाँ खूब वाटर गेम्स पैरा सीलिंग की ..पानी गन्दा था ...पर हम कहाँ बाज आने वाले थे खूब पानी में खेले ..और रात को दियू का नजारा लिया रात का .अगले दिन था इस साल का आखरी दिन ..इस दिन वहाँ का फमुस फोर्ट देखा चर्च देखा और फ़िर की वाटर गेम्स ..पर शाम होते ही यहाँ का माहोल अजब रंग से रंगने लगा ..सब तरफ़ पिय्कड़ ही पिय्कड़ दिखने लगे .वहाँ से हम भागे क्रूस में जहाँ जम के डांस किया और नए साल का स्वागत ..फ़िर वापस होटल में अपने ..अगले दिन वापसी थी ...कभी न भूलने वाली याद गार यात्रा थी यह ...बहुत मदद की हमारी गाड़ी के ड्राइवर हितेश ने ,और बच्चो के हँसते गाते जोश वाले माहोल ने ..अब फ़िर से इंतज़ार है एक ऐसे ही और यादगार सफर का ...!!

Friday, December 12, 2008

संजय वन पार्क..दिल्ली दर्शन भाग १


सर्दी की गुनगुनी धूप और दिल्ली के कुछ ऐसी जगह जहाँ पर आप धूप के साथ साथ प्रकति को भी नजदीक से महसूस कर सकते हैं ...घर तो आज कल इस तरह के हो गए हैं जहाँ धूप आने से भी शर्माती है ...चलिए आज आपको ले चलते हैं संजय वन पार्क ..यह पार्क साउथ दिल्ली में है .दिल्ली हाट के पास .सरोजनी नगर मार्केट को छुते हुए लक्ष्मी बाई नगर के सरकारी फ्लेट्स के सामने बना हुआ है ..एन डी एम सी का यह पार्क बहुत अच्छी तरह से मेंटेन किया हुआ है और यहाँ पर हर साल परफेक्ट हेल्थ मेले का भी आयोजन किया जाता है ...

इस पार्क में बच्चों के लिए झूले हैं और कई तरह के पेड़ और फूल जो आपका मन मोह लेंगे ...एक कुत्रिम झील भी बना रखी है इस में जिस में पानी रहने पर आप ढेर सारी बतखें तैरते हुए देख सकते हैं ...जब हम गए तो यह धूप में आराम फरमा रही थी और उनके आस पास नन्हे नन्हे बच्चे कुछ बड़े लोग भी उनको ब्रेड और दाना खिला रहे थे ...खुली धूप का आनंद और यूँ प्रकति के संग मिल जुल कर एक हो जाने का मजा अब शहरी ज़िन्दगी में बहुत कम मिलता है ...और जब इस तरह का मौका मिले तो उसको चुरा लेना चाहिए ..यह मेरा मनाना है ..तो देर किस बात की ..इस रविवार का लंच बनाईये और उसको पिकनिक बास्केट में ले कर निकल जाए अपने घर के आस पास परिवार और प्रकति के संग संग झूमने के लिए ..और मैं आपसे मिलती हूँ फ़िर इसी तरह के दिल्ली के किसी और खूबसूरत पिकनिक स्पॉट पर इसी लेख की अगली कड़ी में ..

Tuesday, December 9, 2008

Hyderabad: City of Nizams, Pearls and more...

If biryani is all that the name reminds you of then there is a lot you need to know about this vibrant city. A city of Nizams, pearls, lakes, and gardens. A city that eats drinks and sleeps technology! And a city where traditions meet trend.


When I visited Hyderabad, I could feel the Mughal grandeur of old Delhi, Agra and Fatehpur Sikri as soon as I entered the city. And as I familiarized myself with the city I saw how beautifully culture and tradition have mingled with modernity. No wonder it is also called the 'Istanbul of India'.

My exploration started with Hussain Sagar Lake which is a man-made lake famous for the 18-metre tall Buddha statue in the middle of the lake. The Hyderabad tourism department has assured that you have a close encounter with the majestic lake. Take a boat and go to the Buddha statue and feel the romance in the air! In case you are looking for some adventure, do not be disappointed. You can go for para-sailing at a very affordable ticket price.

I next headed to the Lumbini Park which features a musical fountain and 33 statues of various Andhra Pradesh personalities. The technological city has arrangements for technological entertainment! I was overwhelmed to see water dancing in splendid colours on melodious Bollywood tunes. The laser show exhibits, through water, the history of the city, popular places in the old as well as new city and about Tollywood. It was an ecstatic show that left me mesmerized.


I started the next day with a visit to the icon of Hyderabad's leadership in the field of Information Technology in the country— the Hi-tech city. It is located at Madhapur on the outskirts of Hyderabad. A fully integrated, ultra modern town that provides infrastructural facilities, it is a great place to visit. The organizations here give their employees all the comforts—from a dormitory to room with bean bags; fabulous cafeteria to games room and from appetizing food to delicious juices.


Pushing myself away from the glorious workstations, I went to the NTR Gardens which is a great place to hangout in the evenings. The gardens offer a serene as well as an adventurous atmosphere - Machan tree, Japanese garden, fruit restaurant, car cafe, souvenir shops and lots more.



A major attraction in Hyderabad is the Ramoji Film City. It is the world's largest integrated film studio complex, at nearly 2,000 acres. Also it is one of Asia's most popular tourism and recreation centers. It has over 500 set locations. 20 international films and nearly forty Indian films can be produced simultaneously in the complex. Eat, swing, watch skits and dance performances, take a bus ride – there is so much to do!



Trip to Hyderabad would have been incomplete without a visit to Charminar and Golconda Fort. To the west of Charminar is the Lad Bazaar, also known as the "Street of Love". In the bustling street reminiscent of the bygone era, you will find bangles galore. Each bangle set is exclusive in design and colour. If you are blessed with the art of bargaining and love bangles - this bazaar is no less than heaven for you!



Other major attractions in the city are the Birla Mandir, Nehru Zoological Park, the largest zoo in India , Snow World, Falaknuma Palace and of course Salar Jung Museum, which has a treasure of art.


What is one thing you just can not miss while you are in the city? No prizes for guessing this one! It, undoubtedly, is the famous Hyderabadi Biryani. But there are lot more delicacies that a Nizam kitchen has. The delights include Khubani ka Mitha, Pheni and Haleem, a meat dish traditionally eaten by Muslims during the holy month of Ramadan. You may be surprised to know that people from different countries come down to Hyderabad just to have Haleem during Ramadan. Also do not miss Karachi Bakery near Mau'zzam Jahi Market, Nampally. The bakery is popular for its biscuits including the local Osmania biscuits.



The best part about Hyderabad is cheap transportation plus the city is safe even after midnight. Also, people are very friendly. When the locals speak to you in Hindi, the typical 'Hyderabadi dialect' is unlikely to leave you unaffected! Not only is it amusing but you can also feel the warmth they have for their guests.

The bad part about Hyderabad is the traffic as it is a city of bad drivers. It's almost impossible to cross any road, motorbike riders have no driving sense, there is a dearth of traffic signals and nobody pays heed to the traffic police wallahs.

In all, charm of a glorious yesterday and promise of a bright tomorrow - that's Hyderabad for you.

Sunday, December 7, 2008

गुजरात यात्रा भाग १


पिछले साल हम इस महीने के आख़िर में गुजरात घूम रहे थे ..पहले भी जाना हुआ है अहमदाबाद तक और हमेशा यहाँ हमारा दिल जीता हैं यहाँ कुछ रहने वालो ने इस बार इरादा गुजरात के कुछ ख़ास हिस्सों को देखने का था और हर जगह हमारे लिए नई थी .पर पग पग पर वहाँ के कुछ लोगो ने इतना साथ दिया की नया शहर भी अपना सा लगने लगा चाहे वह हमारे साथ चलने वाला ड्राइवर हितेश हो ..या सोमनाथ मन्दिर ,द्वारका मन्दिर में ऑटो वाला हो ... ...... गुजरात घूमने की इच्छा ,और सब बहने और उनके बच्चे साथ ..सच में एक नए साल के स्वागत की नई तैयारी थी ....सफर शुरू हुआ हमारा २६ दिसम्बर से और खत्म हुआ १ जनवरी को ..यह कुछ दिन कैसे पलक झपकते ही गुजरे इसको मेरी बेटी पूर्वा ने बहुत अच्छे से अपनी इस कविता में लिखा है ..............हम सबको उसका यह लिखा और पूरी यात्रा को यूं कुछ शब्दों में समेट लेना बहुत अच्छा लगा ...कुछ याद गार लम्हे मैं समय समय पर लिखूंगी जरुर ..पर पहले आप यह पढे और हमारे गैंग के साथ इस यात्रा में शामिल हो जाए :)

इस trip को किया हमने खूब ENJOY

बहुत अच्छे से कहा 2007 को GOODBYE



बहती WAVES के साथ भेज दिया अपने SORROWS को

GANG OF GIRLS ने अकेले घूम के भगा दिया अपने HORRORS को



CRUISE पे DANCE या जगह जगह POSE

मस्ती की WITHOUT TENSION, WITHOUT ANY बोझ


27th को की अहमदाबाद में SHOPPINg


शाम को की US PIZZA में जमकर HOGGING

द्वारका के TEMPLES देखे on 28th

bet द्वारका में नाव में किया बहुत WAIT



एक DIRTY BEACH देखा in Porbandar

29th को गए Gandhiji के घर के अन्दर



थक कर सवारी पहुँची सोमनाथ

GUEST ROOM मिला फ़िर आई जान में जान



30th को हम पहुंचे DIU

PARASAILING से मिला पानी का अच्छा VIEW



पता चला वहाँ की जनता का थोड़ा ढीला है SCREW

पी के टुन्न थे सभी on the BEACH

शक्ल से ही लग रहे थे काफ़ी नीच



ANYWAYS, हमने किया उन्हें ROYALLY IGNORE

और नही करने दिया उन्हें हमें BORE



CRUISE पे मिलाई ताल से ताल

इस तरह we welcomed the नया साल……….